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Bihar Assembly News: पत्रकारों के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने उठाई आवाज, स्पीकर ने 12 बजे चर्चा का दिया आश्वासन

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Alam Ki Khabar: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में पत्रकारों के मुद्दे पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। पत्रकारों द्वारा खबरों के बहिष्कार के बीच स्पीकर प्रेम कुमार ने दोपहर 12 बजे चर्चा कराने का आश्वासन दिया।

पटना, 22 जुलाई। आलम की खबर: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पत्रकारों से जुड़े विवाद को लेकर माहौल गर्म हो गया। विपक्षी दलों ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों के साथ किए जा रहे व्यवहार और खबरों के बहिष्कार के मुद्दे को सदन में जोरदार ढंग से उठाते हुए तत्काल चर्चा की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए दोपहर 12 बजे इस विषय पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया।

सदन में विपक्षी सदस्यों ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और पत्रकारों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वातावरण में काम करने का अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना था कि हाल के घटनाक्रम के बाद विधानसभा की कार्यवाही का मीडिया कवरेज प्रभावित हुआ है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

विवाद की शुरुआत जनता दल (यू) के विधायक विशाल साह द्वारा पत्रकारों के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत दिए जाने के बाद हुई। इसके बाद पत्रकारों के एक वर्ग ने विरोध स्वरूप विधानसभा की खबरों के बहिष्कार का निर्णय लिया। इसी मुद्दे को विपक्ष ने सदन में प्रमुखता से उठाया।

विपक्षी विधायकों ने मांग की कि पत्रकारों और विधानसभा प्रशासन के बीच उत्पन्न विवाद का जल्द समाधान निकाला जाए। उनका कहना था कि यदि समय रहते सकारात्मक पहल नहीं हुई तो वे सदन की कार्यवाही के बहिष्कार जैसे कदम उठाने पर विचार करेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि इस विषय पर उनकी पत्रकारों से पहले भी बातचीत हो चुकी है और समाधान निकालने का प्रयास जारी है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों की बात सुनी जाएगी और आपसी संवाद के माध्यम से रास्ता निकाला जाएगा।

स्पीकर ने दोपहर 12 बजे इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराने की घोषणा की, जिसके बाद विपक्ष ने फिलहाल अपना विरोध शांत किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकारों के सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

पत्रकारों द्वारा खबरों के बहिष्कार का असर विधानसभा की नियमित मीडिया कवरेज पर भी देखने को मिला। कई पत्रकारों ने विरोध दर्ज कराते हुए रिपोर्टिंग से दूरी बनाई। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बातचीत के बाद क्या समाधान निकलता है और पत्रकारों की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है।

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विशेष टिप्पणी

विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ। दोनों के बीच बेहतर संवाद और पारस्परिक सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है। ऐसे विवादों का समाधान संवाद के माध्यम से ही संभव है ताकि जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी लगातार पहुंचती रहे।

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